CISF INSPECTOR PROMOTION CASE : ClSF में Promotion का बढ़ता संकट : निरीक्षकों ने खोला मोर्चा, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बढ़ा दवाब
केन्द्रीय अर्धसैनिक बलों में CISF की एक अलग पहचान हैं। देश के हवाई अड्डों, परमाणु संस्थानों और महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले इस बल के भीतर इन दिनों एक बड़ा आन्तरिक असंतोष सुलग रहा है। यह असंतोष किसी बाहरी सुरक्षा चुक को लेकर नही, बल्कि बल के भीतर करियर की प्रगति और पदोन्नति की धीमी रफ्तार को लेकर है। हाल ही में CISF के कई Inspectors ने अपनी पदोन्नति की माँग को लेकर एक बड़ा मोर्चा खोल दिया है I
सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया रूख और आदेश के बाद यह मामला अब प्रशासनिक गलियारों से निकलकर कानूनी और नीतिगत बहस का केन्द्र बन गया है।
CISF INSPECTOR PROMOTION CASE : Promotion की राह में क्या है मुख्य विवाद?
किसी भी अनुशासित बल की रीढ़ उसके अधिकारी और जवान होते हैं। जब एक अधिकारी दशकों तक एक ही पद पर ठहर जाता है, तो उसका सीधा असर बाल की कार्यक्षमता और मनोबल पर पड़ता है। सीआईएसएफ के Inspectors का आरोप है कि वे पिछले 15 से 20 वर्षो से एक ही पद पर कार्यरत है, जबकि अन्य सुरक्षा बलों या सेवाओं में Promotion की प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेज है।
विवाद की जड़ कोटा और seniority के नियमों में उलझी हुर्ई है। बल के भीतर दो तरह के कैडर के बीच खींचतान बनी रहती है। एक वे जो सिपाही से भर्ती होकर विभागीय परीक्षाओं के जरिए Inspectors तक पहुंचें हैं, दूसरे वे जो सीजे Sub-Inspectors के रूप में भर्ती हुए। इनके बीच वरिष्ठता के निर्धारण को लेकर लंबे समय से कानूनी लड़ाई चल रही है।

CISF INSPECTOR PROMOTION CASE : सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप और विभाग पर बढ़ा दवाब
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, Supreme Court ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों को समय पर Promotion का अवसर मिलना उनका मौलिक अधिकार न सही, लेकिन सेवा शर्तो का एक अनिवार्य हिस्सा जरूर है। कोर्ट के आदेश के बाद गृह मंत्रालय और CISF मुख्यालय पर उन पदों को भरने का भारी दवाब है जो वर्षो से खाली पड़ें हैं या कानूनी विवादों के कारण रुके हुए थे।
अदालत ने साफ किया कि प्रशासनिक देरी या नियमों की अस्पष्टता का खामियाजा उन अधिकारियों के नही भुगतना चाहिए जिन्होनें अपनी उम्र का बड़ा हिस्सा सेवा में लगा दिया है। इस आदेश के बाद Inspectors के एक बड़ें समूह ने लामबंद होकर मुख्यालय से अपनी मांगों को तुरंत लागू करते की अपील की है।
CISF INSPECTOR PROMOTION CASE : अधिकारियों की मांगें और वर्तमान स्थिति
Inspectors का तर्क है कि असिस्टेंट कमांडेंट (AC) के पद पर Promotion की प्रक्रिया बेहद सुस्त है। कई अधिकारी तो ऐसे है जो Inspectors के पद पर से ही सेवानिवृत होने वाले है, जबकि योग्यता के आधार पर उन्हें अब तक डिप्टी कमांडेंट के स्तर पर पहुँच जाना चाहिए था।
• Promotion में देरी :-
Inspectors का कहना है कि बाप में उच्च पदों पर रिक्तियां होने के बावजूद डीपीसी ( Departmental Promotion committee) की बैठक़ें समय पर नही होती है।
• करियर प्रोग्रेसन (MACP) :-
हालाकि सरकार वित्तीय लाभ देने के लिए MACP योजना लागू करती है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि उन्हें केवल पैसा नही, बल्कि पद और जिम्मेदारी (Rank) चाहिए, जो समाज और बाप के भीतर उनके सम्मान का प्रतीक है।
• कैडर रिव्यू की कमीः .-
बल की बढ़ती नफरी के हिसाब से उच्च पदों का सृजन नहीं किया गया है, जिससे उपर की ओर जाने वाले रास्ते संकरा हो गया है।
यह भी देखें – 8वे वेतन आयोग ने सभी से मांगा सुझाव, अर्धसैनिक बलों के लिए हो सकता है एक मौका?
CISF INSPECTOR PROMOTION CASE : बल के मनोबल पर प्रभाव:-
CISF एक ऐसा बल है जो हमेशा तनावपूर्ण माहौल में काम करता है। Metro station की भीड़ से लेकर संवेदनशील VIP सुरक्षा तक, ये निरीक्षक ही जमीनी स्तर पर नेतृत्व करते है। जब नेतृत्व करते वाला अधिकारी ही कुंठित होगा, तो उसका असर नीचे के जवानों पर पड़ना स्वभाविक है। जानकारों का मानना है कि यदि इस Promotion stagnation को जल्द नही सुलझाया गया तो बल के भीतर VRS लेने वालों की की संख्या बढ़ सकती है।
CISF के inspectors द्वारा खोला गया यह मोर्चा केवल एक विभागीय मुद्दा नही है, बल्कि यह भारत के अर्धसैनिक बलों में व्याप्त ढांचागत समस्यायों का आईना है। सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप एक उम्मीद की किरण लेकर आया है। एक सशक्त और सुरक्षित भारत के लिए जरूरी है कि उनके रक्षक मानसिक रूप से संतुष्ट और करियर के प्रति आश्वस्त हो। अब देखना यह है कि सीआईएसएफ में Promotion की रुकी ट्रेन पटरी पर लौट पायेगी या नही।
Source :- Amar ujala
Only clerical staff and Go’s and driver Of CiSF get promotion before timmilly and get next level benefit,
But jawan to Havaldar to ASI promotion give 20 to 30 years who will hike their next level benifits, as MHA policy get promotion 8 to 10 years that’s is wrong information produced to MHA ground report is 18 to 25 years i.e explote the promotion policy benifit of jawans.