Jharkhand IED Blast : सारंडा जंगल में IED ब्लास्ट : कोबरा के सहायक कमांडेंट सहित जवान घायल, दिल्ली किया गया शिफ्ट
झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले के घने और खतरनाक सारंडा जंगल में रविवार (1 मार्च 2026) सुबह एक बड़ी नक्सलियों द्वारा किए गए हमले में एक गंभीर घटना सामनें आई। नक्सल विरोधी अभियान के दौरान कोबरा के टीम उस समय IED की चपेट में आ गई जब टीम घने जंगल में ऑपरेशन में निकले थे, जिसमें सीआरपीएफ कोबरा 209 के सहायक कमांडेंट अजय मलिक तथा हवलदार विक्रम यादव गंभीर रूप से घायल हो गए I इन दोनों को तुरंत स्वास्थ उपचार के लिए बेहतर अस्पताल में एयरलिफ्ट कर पहले रांची फिर दिल्ली शिफ्ट किया गया है।
Jharkhand IED Blast : घटना कैसे घटीत हुई?
इस ऑपरेशन को पहले से तैयार की गई खुफिया जानकारी के आधार पर तैयार किया गया था, जिसमें नक्सलियों के छिपे होने के संकेत मिले थे I सुरक्षा बलों ने सारंडा के घने जगल में नक्सलियों की तलाश में सर्च ऑपरेशन शुर कर रखी था, जब अचानक एक IED विस्फोट हुआ I यह विस्फोट उस समय हुआ जब सुरक्षा बल जंगल में आगे बढ़ रहे थे। विस्फोट के तुरंत बाद तीव्र गोलाबारी भी शुरू हो गई, जिसमें न केवल धमाके में बल्कि गोला बारी में भी जवान घायल हुए I
सहायक कमांडेंट अजय मलिक की धमाके के Splinter से गंभीर चोटें आई। वहीं कोबरा के हवलदार विक्रम यादव को गोली लगी जिसे तत्काल प्राथमिक उपचार के बाद एयरलिफ्ट कर रांची ले जाया गया और फिर दिल्ली AllMS भेज दिया गया है।

Jharkhand IED Blast : सरकार और प्रशासन का रुख :-
पश्चिम सिंहभूम के वरिष्ट पुलिस अधिकारी एसपी अमित रेणु ने इस हमले की निंदा करते हुए इसे कायरतापूर्ण कार्य बताया। उन्होंने कहा कि नक्सलियों द्वार पहले से लगाए गए IED और गोलाबारी का उद्देश्य सुरक्षा बलों को नुकसान पहुँचाना और आम जनमानस में भय व्याप्त करना था, लेकिन सुरक्षा बलों का मनोबल ऊंचा है और वे बिना रुके नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अभियान जारी रखेंगें I
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस क्षेत्र में पिछले कुछ हफ्तों में तनाव काफी बढ़ गया है, क्योंकि नक्सलियों के खिलाफ पिछले मिशनों में कई प्रत्यक्ष मुठभेड़ों और बम विस्फोट की घटनाएं हो चुकी है I पिछले कुछ हफ्तों में कम से कम तीन बड़े विस्फोट और सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच गोलीबारी की घटनाएं हुई है, जिनमें एक बार एक आम व्यक्ति भी मारा गया था।
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Jharkhand IED Blast : सारंडा जंगल: नक्सल प्रभावित क्षेत्र
सारंडा जंगल झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में स्थित है और यह दशकों से नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्र रहा है I यह इलाका छाने जंगलों, कठिन इसके और कम जनसंख्या के कारण नक्सलियों के छिपने और फिरौती, हथियार तथा IED सेट करने के लिए चुनिंदा जगह बन चुका है I इन इलाके में नक्सल विरोधी ऑपरेशन को चुनौतीपूर्ण बनाता है।
सुरक्षा बलों का मानना है कि इस क्षेत्र में नक्सलियों की मौजूदगी पिछले कुछ महिनों में बढ़ी है, जिसके कारण वे जंगल में हजारों IED छुपा चुके हैं। इन IED को गलती से या सुरक्षा बल के आने पर सक्रिय कर दिया जाता हैं, जिससे सुरक्षा कर्मियों और कभी-कभी निर्दोष लोगों को भी चोटें पहुँचती है।
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Jharkhand IED Blast : सुरक्षा बलों की आपूर्ति और तैयारीः-
नक्सलियों के खिलाफ चल रहे अभियान में विभिन्न सुरक्षा बल शामिल रहती है जिनमें मुख्य रूप से सीआरपीएफ, कोबरा, झारखंड जगुआर होते हैं। इन दलों को जंगल युद्ध, नक्सल विरोधी रणनीतियों और IED detection तकनीकों में प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके बावजूद, नक्सलियों के छिपे हुए IED सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बना हुआ है।
इस घटना के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके को चारों और से सील कर दिया है और अतिरिक्त बलों की तैनाती की जा रही है I साथ ही, आसपास के इलाके में और अधिक IED खोजने के लिए विशेष टीमों को भेजा गया है।
सारंडा जंगल मैं IED ब्लास्ट और मुठभेड़ ने फिर एक बार यह प्रमाणित कर दिया है कि नक्सली हिंसा और उग्रवाद देश के लिए अभी भी एक गंभीर खतरा बना हुआ है I सुरक्षा बलों की बहादुरी और प्रतिबद्धता के बावजूद यह क्षेत्र अब भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है और अब नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षा बलों का अभियान और तेज होगा।