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CISF COURT CASE : कलकत्ता हाईकोर्ट का CISF जवान के मामले में बड़ा आदेश, कहा- करियर बर्बाद नहीं कर सकते l

CISF COURT CASE

CISF COURT CASE : कोलकाता हाईकोर्ट ने सीआईएसएफ जवान की बर्खास्तगी पर कड़ी टिप्पणी की, करियर के साथ समझौता नहीं किया जा सकता

हाल ही में कोलकाता हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामले पर अपना फैसला सुनाया,  जिसमें सीआईएसएफ के एक जवान की बर्खास्तगी पर सवाल उठाया गया था। कोर्ट ने सीआईएसएफ जवान की बर्खास्तगी को अमान्य करार दिया और इस पर कड़ी टिप्पणी की, यह कहकर कि ” यह किसी कर्मचारी के करियर को नष्ट करने के समान है और इसे किसी भी कीमत पर सही नहीं ठहराया जा सकता I ” कोर्ट का यह फैसला सरकारी सेवाओं में काम करने वाले कर्मचारियों के अधिकारों के संरक्षण और उनके करियर की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

CISF COURT CASE : मामले की पृष्टभूमि :-

मामला एक सीआईएसएफ कांस्टेबल का था, जिसे उसके कुछ व्यक्तिगत कारणों और अनुशासनहीनता के आरोप में बर्खास्त किया गया था। यह जवान पिछले कुछ वर्षों से सीआईएसएफ में सेवा दे रहा था, लेकिन उसे कुछ आरोपों का सामना करना पड़ा, जिसके बाद सीआईएसएफ अधिकारिय़ों ने उसे बर्खास्त करने का आदेश जारी कर दिया। सीआईएसएफ ने जवान के खिलाफ कुछ गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई की थी, जिसमें आरोप था कि उसने अपनी सेवा में लापरवाही बरती तौर अन्य नियमों का उल्लंघन किया।

CISF COURT CASE : हाईकोर्ट का निर्णय :-

कोलकाता हाईकोर्ट ने मामले की गहराई से सुनवाई की और पाया कि सीआईएसएफ ने अपनी निर्णय में उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया I कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि सीआईएसएफ द्वारा कांस्टेबल को बर्खास्त करने का कदम अत्यधिक कठोर था और यह बिना उचित कारण और निष्पक्ष सुनवाई के लिया गया था। न्यायालय ने यह भी कहा कि किसी कर्मचारी को बिना पर्याप्त जांच और सुनवाई के बर्खास्त करना उनके करियर को नष्ट करने के समान है, जो किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता I

कोर्ट ने सीआईएसएफ की कार्रवाई को असंवैधानिक करार दिया और कान्स्टेबल को पुऩः बहाल करने का आदेश दिया। यह फैसला न केवल इस कांस्टेबल के लिए राहत का कारण बना, बल्कि पूरे देश में सरक़ारी सेवाओं में कार्यरत कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा करने का एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत किया।

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CISF COURT CASE : अधिकारों की सुरक्षा और सरकारी कर्मचारियों के लिए न्यायः –

यह मामला सरकारी कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश लेकर आया है। भारत में सरकारी कर्मचारियों को अपनी नौकरी में अनुशासन और प्रदर्शन का पालन करने की अपेक्षा होती है,  लेकिन यह भी महत्वपूर्ण है कि उन पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई करते समय पूरी प्रक्रिया का पालन किया जाए। सीआईएसएफ जैसे बड़े संगठन के लिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि उनके कर्मचारियों के खिलाफ किसी भी सरकार की कार्रवाई निष्पक्ष और पारदर्शी हो।

किसी भी कर्मचारी को अनुशासनहीनता या सेवा में कोई अन्य उल्लंघन के कारण सजा देने से पहले, यह जरूरी हैं कि उन्हें अपनी बात रखके का मौका मिले और पूरी जांच की जाए। यह सुनिश्चित करना कर्मचारियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है और यह किसी भी प्रकार के पक्षपाती निर्णय से बचने में मदद करता है।

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CISF COURT CASE : न्यायालय के फैसले का प्रभाव:-

यह फैसला सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बहुत बड़ी राहत है, क्योंकि अब यह साफ हो गया हैं कि किसी भी कर्मचारी को उनके करियर को नुकसान पहुँचाने वाली कार्रवाई से बचाने के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जा सकता है। खासकर अर्धसैनिक बल जैसे संगठन में कार्यरत कर्मचारी,  जो अपनी जान की सुरक्षा के लिए हर दिन कड़ी मेहनत करते है, उनके अधिकारों की रक्षा के दिए ऐसे फैसले अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

इसके अलावा, इस फैसले (CISF COURT CASE) से यह भी स्पष्ट हो गया है कि अदालतें अपने निर्णयों में निष्पक्षता और कर्मचारियों के अधिकारों का सम्मान करती है। इस तरह के फैसले भविष्य में सरकारी सेवाओं में कार्यरत कर्मचारियों को न्याय की उम्मीद दिलाते हैं।

कोलकाता हाईकोर्ट का यह फैसला सरकारी कर्मचारियों के अधिक़ारों की रक्षा और अनुशासनहीनता के मामलों में निष्पक्षता की आवश्यकता को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम हैं। अदालत ने सीआईएसएफ के कांस्टेबल के मामले में जो निर्णय़ लिया, वह यह दर्शाता है कि किसी भी कर्मचारी के साथ किए गये अनुशासनात्मक कृत्य को पुरी प्रक्रिया और निष्पक्षता से ही अंजाम दिया जाना चाहिए, ताकि उनके करियर को किसी भी तरह से प्रभावित न किया जाए। यह फैसला सरकारी कर्मचारिय़ों के लिए एक आशा की किरण के रूप में सामने आया हैं।

News source : Jansatta.com

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