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CRPF Jawan Court Case : तेलंगाना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, CRPF जवान के परिवार को मिली राहत, कोर्ट ने कहा – FIR की जरूरत नहीं।

CRPF Jawan Court Case : तेलंगाना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : लापता CRPF जवान के परिवार को मिलेगा सर्विस बेनिफिट

Telanana High court ने केन्द्रीय अर्धसैनिक बलों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि कोई जवान ड्युटी के दौरान लापता हो जाता है तो उसके परिवार को सेवा संबंधी लाभ देने के लिए अलग से एफआईआर दर्ज कराना अनिवार्य नही है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बल अपने किसी सदस्य की प्रति जिम्मेदारी से बच नही सकती है।

यह मामला CRPF के जवान एम श्रीकांत से जुड़ा है,  जो 1 जून 2015 से लापता हो गये थे I उस समय वह दिल्ली स्थित ग्रुप सेन्टर में कम्यूटर प्रशिक्षण ले रहे थे I यह प्रशिक्षण उनके पुनर्वास कार्यकम का हिस्सा था,  क्योंकि पहले एक दुर्घटना में उनका एक पैर काटना पड़ा था और उन्हें Combat Duty के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था।

जब वह अचानक गायब हो गये, तो काफी समय तक उनका कोई पता नही चल सका I बाद में CRPF अधिकारियों ने उन्हें भगौड़ा मानते हुए 2017 में सेवा से हटा दिया। इसके बाद उनके पिता ने इस फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

CRPF Jawan Court Case : कोर्ट ने क्या अहम टिप्पणी की?

मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि जिस समय जवान लापता हुआ, वह CRPF के नियंत्रण में थे I इसलिए के केवल इस आधार पर कि परिवार ने अलग से FIR दर्ज नहीं कराया, उन्हें सेवा से हटाना उचित नही माना जा सकता I

अदालत ने यह भी कहा कि यदि सुरक्षा बल अपने किसी जवान के साथ इस तरह का रवैया अपनाते हैं तो इससे लोगों का भरोसा कमजोर होगा और परिवार अपने बच्चों को सुरक्षा बल में भेजने से हिचकेंगे I

CRPF Jawan Court Case

CRPF Jawan Court Case : सबूतों की कमी पर भी सवाल:–

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पाया कि उस अवधि के बहुत से महत्वपूर्ण रिकॉर्ड जैसे रजिस्टर और CCTV फुटेज उपलब्ध नही थे I इन सबूतों के बिना यह साबित करना मुश्किल था कि जवान वास्तव में भगौड़ा था या उसने जानबुझ कर ड्यूटी छोड़ी थी।

इसी आधार पर अदालत ने CRPF द्वारा जारी सेवा समाप्ति आदेश को रद्द कर दिया और कहा कि जब तक यह साबित न हो कि जवान ने जानबूझकर ड्यूटी छोड़ी हैं, तब तक उसे भगौड़ा घोषित करना उचित नही है।

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CRPF Jawan Court Case : परिवार को मिलेगा आर्थिक लाभ –

हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि संबंधित अधिकारियों को जवान को ” Missing” मानते हुए उसके परिवार को सभी वैधानिक सेवा लाभ प्रदान करने होंगें। इसमें पेंशन व अन्य वित्तीय लाभ भी शामिल हैं।

अदालत ने यह भी कहा कि किसी जवान के लापता होने की स्थिति में उसके परिवार को अनावश्यक कानूनी प्रक्रियायों में उलझाना उचित नहीं हैं I यदि बल के रिकार्ड में यह स्पष्ट हैं कि वह जवान ड्यूटी के दौरान या संस्थान के नियंत्रण में था, तो उसके परिवार को सहायता मिलती चाहिए।

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CRPF Jawan Court Case : फैसले का व्यापक प्रभाव

यह फैसला केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। कई बार ऐसी स्थिति आती है जब किसी जवान का पता लंबे समय तक नहीं चाप पाता I ऐसे मामले में परिवार को पेंशन और अन्य लाभ पाने के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

तेलंगाना हाईकोर्ट का यह फैसला न केवल एक परिवार को न्याय दिलाने वाला हैं, बल्कि यह केन्द्रीय अर्धसैनिक बलों में कार्यरत हजारों जवानों और उनके परिवारों के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश देता हैं। अदालत ने साफ कहा कि सुरक्षा बल अपने किसी सदस्य कर्मजीत जिम्मेदारी से मुंह न ही मोड़ सकते। यदि कोई जवान ड्यूटी के दौरान लापता हो जाता है तो, उसके परिवार के अधिकारों की रक्षा करना उतना ही जरूरी है जितना राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना।

समाप्त!

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