CRPF CONSTABLE COURT CASE : राजस्थान हाईकोर्ट ने CRPF के एक कांस्टेबल को सेवा में पुऩः बहाल करने का आदेश दिया है।
CRPF CONSTABLE COURT CASE : राजस्थान हाईकोर्ट ने CRPF के एक कांस्टेबल के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को रद्द करते हुए उसे सेवा में पुऩः बहाल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यदि किसी कर्मचारी पर लगाया गया मूल आरोप ही तथ्यात्मक रूप से गलत हो, तो उस आधार पर की गई पूरी विभागीय कार्रवाई टिक नहीं सकती।
यह मामला उस CRPF कांस्टेबल से जुड़ा है, जिसे ट्रेनिंग अवधि के दौरान कथित रूप से ” फोर्स से भाग जाने” के आरोप में दंडित किया गया था। विभागीय जाँच के बाद उसे सेवा से बाहर कर दिया गया था, जिसे चुनौती देते हुए कांस्टेबल ने राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
CRPF CONSTABLE COURT CASE : क्या था पूरा मामला
याचिकाकर्त्ता कांस्टेबल पर कुल चार आरोप लगाए गए थे। इनमें सबसे गंभीर आरोप यह था कि उसने ट्रेनिंग के दौरान बिऩा अनुमति के यूनिट छोड़ दी और लंबे समय तक अनुपस्थिति रहा, जिसे विभाग” डेजर्सन” ( भाग जाना) की श्रेणी में रखा।
हलांकि कांस्टेबल ने कोर्ट को बताया कि वह किसी अनुशासनहीन मंशा से नहीं, बल्कि किड़नी में तेज दर्द और स्वास्थ्य समस्या के कारण ड्यूटी से अनुपस्थित हुआ था। उसने यह भी स्पष्ट किया कि इलाज के बाद वह स्वंय भी वापस ड्यूटी पर लौट लाया था और उसका कभी फोर्स छोड़ने का इरादा नहीं था।
CRPF CONSTABLE COURT CASE : हाइकोर्ट की अहम टिप्पणी
मामले की सुनवाई करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा की ड्यूटी से अस्थाई अनुपस्थिति और फोर्स से भागने के इरादे में स्पष्ट कानूनी अंतर होता है I कोर्ट ने माना की किसी कर्मचारी को ‘डेजर्टर’ ठहराने के लिए यह साबित करना जरूरी है कि उसका उद्देश्य स्थायी रूप से सेवा छोड़ने का था।।
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि चार्जशीट में लगाया गया मुख्य आरोप ही तथ्यों से मेल नही खाता, तो उस पर आधारित पूरी अनुशासनात्मक कार्रवाई न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ हो जाती है I
CRPF CONSTABLE COURT CASE : चार्जशीट पर सवाल
हाईकोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि विभाग ने चार्जशीट तैयार करते समय परिस्थितियों और साक्ष्यों का समुचित मूल्यांकन नहीं किया I अदालत ने कहा की केवल अनुपस्थिति के आधार पर किसी जवान को भागा हुआ मान लेना उचित नहीं है, खासकर जव वह बाद में स्वयं सेवा में वापस आया हो।
कोर्ट के अनुसार, अनुशासन बनाए रखना जरुरी है, लेकिन यह भी उतना ही आवश्यक है कि कार्रवाई निष्पक्ष, तर्कसंगत और मानवीय दृष्टिकोण से की जाए।
CRPF CONSTABLE COURT CASE : सेवा रिकार्ड को भी माना गया अहम
अदालत ने यह भी ध्यान में रखा की संबंधित कांस्टेबल का पूर्व सेवा रिकार्ड संतोषजनक रहा है और उसके खिलाफ पहले कोई गंभीर अनुशासनात्मक मामला सामने नही आया था। ऐसे में उसपर लगाया गया अत्यधिक कठोर दंड न्यायसंगत नही माना जा सकता।
कोर्ट का अंतिम आदेश
इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने कांस्टेबल (CRPF CONSTABLE COURT CASE) के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को रद्द कर दिया और उसे सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया। साथ ही अदालत ने यह संदेश भी दिया कि विभागीय कार्रवाई में आरोपों की सटीकता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है।
क्यों है यह फैसला अहम
यह फैसला न केवल CRPF बल्कि सभी अर्धसैनिक बलों और सरकारी विभागों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह स्पष्ट करता है कि अनुशासन लागू करते समय जल्दबाजी या गलत आधार पर की गई कार्रवाई न्यायिक जांच में टिक नही पाती।
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